शहर मे पिघलने वाले लोग ही नहीं रहे..Sad Shayari
तू भी खामख्वाह बढ़ रही है ऐ धूप.. इस शहर में पिघलने वाले लोग ही नहीं रहे…❤️ -shabdanchigammat
तू भी खामख्वाह बढ़ रही है ऐ धूप.. इस शहर में पिघलने वाले लोग ही नहीं रहे…❤️ -shabdanchigammat
When existence is born out of struggle, living life has a different dimension संघर्षातून अस्तित्व निर्माण झाले की, आयुष्य जगण्यात